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Friday, 15 May 2015

Lesson1: The observation of language

और पहला अध्याय
First lesson of Persian tutorial blog throgh Hindi language. Hope you like it!
अध्याय - १

इससे पहले कि आप कुछ सीखें, उदाहरण समझने के लिए इन आरंभिक शब्दों को याद रखें -


मन - मैं । तू - तू । उ  - वो ।
आमदन - आना । रफ़्तन - जाना । गुफ़्तन - बोलना । करदन - करना ।
किताब - किताब यानि पुस्तक । गुल - फूल । ख़ुदा - ईश्वर । मीज़ - टेबल (मेज) ।


फारसी के सबसे आरंभिक वाक्य, सीखने के लिए यह देखें -


ख़ुदा यक अस्त - ईश्वर एक है । (यक -एक, अस्त - है) ।
मन गुफ़्तम - मैने कहा । तू गुफ़्ती - तूने कहा । उ गुफ़्त -  वो बोला ।


यहाँ दिए गए वाक्य या तो टिप्पणी है या भूत काल में है । ये जानकर कि बोलने को गुफ़्तन कहते हैं, वाक्यों का विन्यास समझ में अपने आप आ जाएगा ।


कुछ ध्यान में रखने की बातें -
  • क्रिया (कोई काम, verb) का अन्त फ़ारसी में तन या दन से ही होता है । जैसे गुफ़्तन, रफ़्तन, आमदन । अलग काल और पुरुषों के लिए इनका रूप बदलता है ।
  • फ़ारसी में अगर आप कोई बात कहें जिसमें नाम का ज़िक्र न हो, तो ये कहना मुश्किल है कि ये किसी पुरुष के लिए कही गई है या स्त्री के लिए । उदाहरणार्थ - वो जा रहा है और वो जा रही है का अंतरित फ़ारसी एक ही होगा - उ मीरवद । ध्यान दीजिये कि हिन्दी में प्रथम और द्वितीय पुरुष (मैं और तुम) में भी लिंगभेद वाक्य से स्पष्ट हो जाता है । (मैं जा रहा हूँ, मैं जा रही हूँ)


वाक्य बदलने के तरीके

निषेध

ख़ुदा यक नः अस्त (या नेस्त) - ईश्वर एक नहीं है । मन नः गुफ़्तम - मैने नहीं कहा ।

प्रश्न

अया ख़ुदा यक अस्त - क्या ख़ुदा एक है? अया मन गुफ्तम - क्या मैने कहा ? मन चेः गुफ़्तम - मैने क्या कहा ?

विभक्तियाँ (Prepositions)

दर केताब - पुस्तक में । बर मीज़ - मेज़ (टेबल) पर । केताब रॉ - किताब को । अज़ केताब - किताब से । बराए किताब - किताब के लिए । ता केताब - किताब तक । अज मीज़ ता केताब - मेज़ से किताब तक । वर्क़-ए-केताब - किताब का पन्ना ।


विभक्तियों और प्रश्न के लिए अगला अध्याय देखें ।


ये हमेशा ध्यान में रखें कि ये उदाहरण फ़ारसी भाषा का स्वरूप समझाने के लिए हैं । इनके उच्चारण और प्रयोग के लिए और अभ्यास की आवश्यकता है ।


अभ्यास



लड़के को पिसर (या पेसर) कहते हैं । अब इनकी फ़ारसी विचारें


लड़के से - अज़ पेसर (संक्षेप में इसे ज़ि पिसर भी कहते हैं)
लड़के पर - बर पेसर
लड़के तक - ता पेसर

इसमें ये नहीं बताया गया है कि ‘लड़के का’ को क्या कहेंगे । इसके लिए अगला अध्याय देखें । पढ़ते रहें ... ।


इसके पहले कि आप आगे बढ़ें, मैं आपको सलाह दूँगा कि http://www.easypersian.com/ वेबसाइट पर लिखी शुरुआती जानकारी पर एक बार नज़र फेर लें ।

ये ध्यान दें कि उपरोक्त वाक्य सभी rough idea के लिए हैं । अतः अधिक समय गँवाने की ज़रूरत नहीं है । 

A new HIndi tutorial blog of Persian

Hello Everyone! This is the start of a new tutorial blog on Persian. I shall be writing a simple way of learning Persian (Farsi) through some Hindi lessons. Should be easy to follow and well discussed. Please let me know of your comments.
विचार


इस विषय की अवधारण और आवश्यकता पर एक टिप्पणी आवश्यक समझता हूँ । वैसे तो फ़ारसी सीखने और समझने के लिए अंग्रेज़ी और उर्दू में कई किताबें और ऑनलाइन स्रोत हैं, फिर यह हिन्दी टीका क्यों ज़रूरी समझा? अंग्रेज़ी पाठों के साथ ये समस्या है कि ये पाठक के मंतव्य को साथ में लेकर नहीं चलते । फ़ारसी पढ़ने के कई प्रयोजन हो सकते हैं - मध्यकालीन शाइरी, ज्योतिष, यूनानी चिकित्सा और आरंभिक फारसी के स्वरूप को जानने की इच्छा । लेकिन इन के इच्छुक पाठकों को अंग्रेज़ी पाठों में इन ग्रंथों के संदर्भों वाले उद्धरण नहीं मिल पाते । निस्संदेह, बिना सुगम उदाहरणों के पाठकों को अपने लक्ष्य के साथ जोड़ कर पढ़ पाना मुश्किल हो जाता है । 

उर्दू किताबों और दरसों (पाठों) के साथ समस्या यह है कि कई पाठकों को उर्दू लिखते आती नहीं लेकिन फ़ारसी सीखने की संपूर्ण लगन और क्षमता रखते हैं । दूसरे, कि उर्दू की किताबों के उदाहरण मुख्यतः धार्मिक लक्ष्य को देख कर लिखे जाते है । इस स्थिति में वे पाठक जो इस्लाम धर्म की जानकारी नहीं रखते, अक्सर हतोत्साहित हो जाते हैं । अतः एक नए हिन्दी पाठ की आवश्यकता महसूस हुई जो पाठक के मंतव्य को ध्यान में रखते हुए सुगम्य और अर्थपूर्ण हों ।

अतः टूटी-फूटी, लेकिन बोलने लायक फ़ारसी सीखने के लिए कुछ सरल अध्यायों की प्रस्तुति कर रहा हूँ ।


फ़ारसी की पहली किताब - आश्चर्य है कि फ़ारसी की किताबें लखनऊ में  भी नहीं मिलतीं ।

पहले की तैयारी


लेकिन कई बात पाठकों को किताब शुरु करने से पहले ध्यान में रखनी चाहिए -
  1. फ़ारसी लिपि दाहिने से बाएँ (<----) में लिखी जाती है जो अरबी लिपि पर आधारित है । इसी पर आधारित ऊर्दू की लिपि है, लेकिन उर्दू में और भी अक्षर जोड़े गए हैं जो फ़ारसी में नहीं हैं ।
  2. फ़ारसी शब्दों को हिन्दी लिपि में लिखने (लिप्यंतरण) में नुक़्तों का प्रयोग बहुत होता है, इनके उच्चारण पर ध्यान देते रहें । इन नुक़्तों का प्रयोग, उच्चारण और हिज्जे के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है ।
  3. फ़ारसी में ‘वर्तमान काल’ सबसे अन्त में सिखाया जाता है क्योकि यह अन्य काल से अधिक नियम-कानून (या कहें तो बिना नियम-क़ानून) वाला है ।
  4. फ़ारसी में कई ऐसे शब्द हैं जो उर्दू में (और हिन्दी में) प्रयुक्त तो होते हैं पर उनका अर्थ वही नहीं है जो फ़ारसी में प्रयुक्त है। इस किताब में जहाँ भी फ़ारसी शब्द देवनागरी (हिन्दी) लिपि में लिखे गए हैं - तिरछे हैं । इन बातों के साथ अगर फ़ारसी पढ़ने की शुरुआत की गई तो बहुत लाभकारी होगी ।


References:
  1. चहल सबक़ - मुंशी हसन अली नक़्शबंदी। ताज कंपनी, चौक बाज़ार, सहारनपुर ।
  2. रहबरे फ़ारसी याने फ़ारसी बोलचाल । मौलाना मुश्ताक़ अहमद साहब, चरथावली । मक़तबे थानवी, देवबंदी ।
  3. आरास्तन - अशरफ़ सउदी । बाकवी फ़ाज़ल देवबन्द ।

तो पहले पाठ के लिये हो जाइये तैयार । हफ़्ते में ३-४ लेसन्स के लिए !

अमित